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गाजीपुर के लाल दिनेश लाल यादव’ को मिली पहली सफलता की कहानी, दिनेश लाल यादव के नाम के साथ कैसे जुड़ा ‘निरहुआ’ शब्द?

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सबसे सुरक्षित किलों में से एक ‘आजमगढ़’ में समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ‘अखिलेश यादव’ के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद दिनेश लाल यादव (निरहुआ) किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं, हालांकि निरहुआ 2019 का लोकसभा चुनाव हार गए थे लेकिन कुछ ही हफ्तों पहले आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में अखिलेश यादव के चचेरे भाई व सपा प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव को 8679 वोटों से चुनाव हराकर संसद भवन पहुंचने में कामयाब हो चुके हैं।

दिनेश लाल यादव (निरहुआ) की पहचान अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने या फिर सपा के सुरक्षित किले को फतह करने भर महदूद नहीं है, राजनेता से पहले निरहुआ एक चर्चित भोजपुरी गायक और अभिनेता हैं इसलिए आज हम निरहुआ को मिली पहली सफलता के बारे में जानने की कोशिश करेंगे।

निरहुआ की पढ़ाई कोलकाता से क्यूँ हुई?

दिनेश लाल यादव के पिता स्वर्गीय कुमार यादव कोलकाता के किसी फैक्ट्री में काम करते थे इसलिए ‘वीरों की धरती’ के नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के एक निम्नवर्गीय किसान परिवार में जन्मे दिनेश लाल यादव की स्कूली शिक्षा-दीक्षा कोलकाता में ही पूरी हुई। पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी आम निम्नवर्गीय परिवार के नौजवान की तरह कोलकाता जैसे बड़े शहर में नौकरी करना दिनेश लाल यादव ने ठीक नहीं समझा और वापस अपने गांव लौट आए।

गांव लौटने के बाद गाजीपुर जनपद के हजारों नौजवानों की तरह सेना में जाने की तैयारी करने के बजाय दिनेश लाल यादव किसानी करते हुए गांव के छोटे-छोटे कार्यक्रमों में मंच से गायन कर जनता का मनोरंजन करने लगे, चूंकि दिनेश का पूरा परिवार गायन और लेखन में दिलचस्पी रखता था इसलिए दिनेश के इस हुनर को परिवार का भरपूर समर्थन मिला। साल 2003 तक दिनेश लाल यादव कई भोजपुरी गानों में अपनी आवाज दे चुके थे लेकिन गायन के क्षेत्र में कई साल काम करने के बावजूद दिनेश लाल यादव को बड़ी कामयाबी नहीं मिल रही थी।

इस तरह से हिट हुआ पहला एल्बम!

फिर साल 2003 में दिनेश लाल यादव ने किसी म्युजिक कंपनी के लिए एक नया म्युजिक एल्बम ‘निरहुआ सटल रहे’ रिकॉर्ड किया लेकिन जिस कंपनी के लिए यह एल्बम रिकॉर्ड किया गया था उस कंपनी ने इस एल्बम को लेने से इनकार कर दिया जिसके बाद दिनेश लाल यादव मुम्बई स्थित म्युजिक कंपनी ‘टी-सीरीज’ के ऑफिस पहुंचे और वहां एल्बम रिलीज करने के संदेश के साथ एल्बम को सौंप कर वापस किसानी में जुट गए। जब टी-सीरीज ने बिरहा और गाने के संगम की तरह दो पक्षों के बीच की चर्चा को बयां करते हुए इस म्युजिक एल्बम को रिलीज़ किया तो यह एल्बम भयंकर हिट हो गया।

नाम के साथ प्रशंसकों ने जोड़ा ‘निरहुआ’ शब्द

दिनेश लाल यादव को अपनी कामयाबी का एहसास उस वक्त हुआ जब उन्होंने पास के गांव के कार्यक्रम में मौजूद हजारों की भीड़ को चिल्लाते सुना ‘निरहुआ सटल रहे’। भोजपुरी संगीत की दुनिया को एक नया आयाम देने वाले इस म्यूजिक एल्बम ने दिनेश लाल यादव को एक सुपरस्टार भोजपुरी गायक के रूप में स्थापित तो किया ही साथ ही ‘निरहुआ सटल रहे’ गाने के प्रशंसकों ने दिनेश लाल यादव के नाम के साथ ‘निरहुआ’ शब्द को भी नत्थी कर दिया।

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